अद्भुत फलदाई फ़ैसल
जौ'Barley'एक अद्भुत फलदाई फसल। हमारे देश में जौ की फसल को जव और अँग्रेजी में
जिसे Barley Crop कहते है, यह विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक
है। जौ या जव वैज्ञानिक रूप से होर्डियम वल्गारे एल के रूप में जाना जाता है, चावल,
गेहूं और मक्का के बाद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में इसकी गिनती होती है। जौ
का पौधा पोएसी परिवार की रबी अनाज की फसल है। जौ की फसल विश्व में ज्यादातर जहां
ठंडे और अर्ध-शुष्क वातावरण होता है वहीं के भू भागों में उगाई जाती है। ऐसी
मान्यता है कि जौ की उत्पत्ति विश्व के मध्य पूर्व देशों में हुई थी। प्राचीन समय
में यह मुख्य रूप से हम इंसानों के उपभोग के लिए उगाया जाता था, लेकिन आज के समय जौ
का उत्पादन पशु चारा, माल्ट उत्पादों और मानवीय भोजन और शिशु आहार के रूप मे प्रयोग
किया जाता है। इसका उपयोग हमारे भारत देश में प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं में
हिंदू धार्मिक कर्मकांडों से लेकर अनेकों सामाजिक आयोजनों में भी होता रहा है।
संस्कृत में इसे "यव" कहते हैं। जौ मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन, अमरीका, जर्मनी,
कनाडा और भारत में पैदा किया जाता है। वैसे यहां आपको बता दें कि हमारे भारतीय
संस्कृति में यज्ञों से लेकर अनेकों तीज-त्यौहारों और शादी-ब्याहों में अनाज के साथ
इससे पूजन में शामिल करने की परिपाटी आज तक कायम है। हिन्दू धर्मावलंबियों में जौ
का विशेष महत्व है। होली पर्व से लगने वाले नव भारतीय संवत् में नवा (नये) अन्न
खाने की परंपराओं को निभाने के लिये बिना जौ के संपन्न ही नहीं होते है। इसी कारण
लोग होलिका की आग से निकलने वाली हल्की लपटों में जौ की हरी कच्ची बालियों को आंच
दिखा कर रंग खेलने के बाद भोजन करने से पहले दही के साथ जौ को मिला कर खाकर नवा
(नए) अन्न खाने की शुरुआत करने वाली परंपरा का निर्वहन करते हैं। जौ का उपयोग
हिन्दू घरों में होने वाले शादियों के समय होने वाले द्वाराचार में भी आज तक उपयोग
होता चला आ रहा है। घर की महिलाएं वर पक्ष के लोगों पर अपनी चौखट पर मंगल गीत गाते
हुए दूल्हे सहित अन्य लोगाें पर इसकी बौछार करना शुभ मानती हैं। मृत्यु के बाद होने
वाले कर्मकांड तो बिना जौ के संपन्न नहीं हो सकते। वैसे आज के समय में आधुनिकता की
वयार ने ऐसे हिन्दू संस्कृतिक परम्पराओं के क्षीण होते चले जाने से यह परिपाटी
धीरे-धीरे समाप्ती की ओर अग्रसर हो गई है। वैसे जौ की खेती सम्पूर्ण विश्व में लगभग
100 देशों में की जाती है तो वहीं वर्ष 2011 के एक आंकड़े के अनुसार यूक्रेन विश्व
में सर्वाधिक जौ उत्पादक देश था। यह ध्यान देने योग्य बात है कि हृदय स्वास्थ्य और
हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के लिए नियंत्रित खान पान के साथ ही स्वास्थ्य जिवन पद्धति
को अपनाने की जरूरत है। 1. जौ मानवीय शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिये
जौ की पत्तियों का भी उपयोग किया जा सकता है। जौ से संबंधित एक शोध में इस बात का
उल्लेख मिलता है कि इसकी पत्तियों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले गुण पाये
जाते है। वहीं, दूसरी ओर यह भी माना गया है कि जौ के बीज में मौजूद बीटा-ग्लूकेन
प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करने के साथ ही उसे शक्तिशाली करने का भी काम करता
है। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने
के लिये जौ की बनी दलिया खाने से फायदे मिल सकते हैं। 2. यौन स्वास्थ्य के लिए यौन
स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए भी जौ से फायदे हासिल किए जा सकते हैं। यौन स्वास्थ
बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से संबंधित एक शोध में इस बात को स्वीकार गया है। शोध
रिपोर्ट में उल्लेख मिलता है कि जौ में एफ्रोडिसिएक (aphrodisiac) यानी कामेक्षा को
बढ़ाने वाला गुण पाया जाता है। वहीं, शोध से यह भी जानकारी मिलीं है कि यह जननांग
में रक्त संचार में वृद्धि करने में सहायक हो सकता है। वहीं, यह ब्लड प्रेशर, हृदय
समस्या, अनिद्रा, अवसाद जैसे शारीरिक विकार और डायबिटीज से राहत दिलाने में भी
कारगर सिद्ध हो सकता है। 3. वजन घटाने में मददगार जौ का दलिया खाने के फायदे में
बढ़ते वजन को नियंत्रित करना भी शामिल है। इसलिए, बढ़ते वजन को कम करने की इच्छा रखने
वाले लोग भी जौ को अपने आहार में जगह दे सकते हैं। दरअसल, जौ में बीटा-ग्लूकेन,
रेजिस्टेंट स्टार्च, टोकोल्स, डायट्री फाइबर, पॉलीफिनोल्स, पॉलीसैकराइड और
फाइटोस्टेरोल्स पाए जाते हैं। इन सभी तत्वों की मौजूदगी के कारण जौ के गुण में
एंटीओबेसिटी (वजन को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है तो वहीं, डॉक्टरों के
मुताबिक बीटा ग्लूकेन (सोल्यूबल फाइबर का एक प्रकार) भूख को नियंत्रित करने में मदद
करता है, जिससे वजन को घटाने में मदद मिलती है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि
वजन घटाने के उपाय में जौ के इस्तेमाल को शामिल किया जाना बहुत फायदेमन्द है।
सम्पूर्ण विश्व में जौ की फसल लगभग 70 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर उगाई जाती है। जौ की
वैश्विक उत्पादन लगभग 160 मिलियन टन है। दुनिया में,जौ उगाने के मामले में यूरोप
एशिया के बाद सबसे प्रमुख महाद्वीप है। सम्पूर्ण दुनिया में जौ उत्पादक देशों में
रूसी संघ, चीन, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, ब्रिटेन और भारत जैसे
देश शामिल हैं। भारत में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और
हिमाचल प्रदेश जौ की फसल के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। e
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